गुरुवार, 13 अगस्त 2026

उठेंगे हर बार


 

जब भी दिल ने चाहा,

थोड़ी  खुशी जी लें।

धूप में खड़े होकर,

थोड़ी छाँह पी लें।


सोचा था कि अब तो,

गम के बादल छटेंगे।

खुशियों के फूल आँगन में,

हमारे भी महकेंगे।


पर किस्मत की चाल ने,

फिर पासा चल दिया।

हँसते हुए चेहरे को,

पल में छल दिया।


उठाया खुद को सम्भालने,

ऐसा जोर से हिला दिया,

सपनों के आशियाने को,

खाक में मिला दिया।


गिरना, फिर उठना सम्भलना,

फितूर है हमारा।

टूटे हुए हौसलों को देना,

फिर से नया सहारा।


पटके, चाहे जितना पटके!

जिंदगी हमें जमीन पर।

उठेंगे हम हर बार,

एक नई उम्मीद  लेकर।।

उठेंगे हर बार

  जब भी दिल ने चाहा, थोड़ी  खुशी जी लें। धूप में खड़े होकर, थोड़ी छाँह पी लें। सोचा था कि अब तो, गम के बादल छटेंगे। खुशियों के फूल आँगन में,...