रिश्ता हमारा भी बेहद अनमोल था,
रखा था हमने एक दूजे का पूरा ख्याल ।
फर्क़ सिर्फ इतना था........
मेरे ख़यालों में सिर्फ और सिर्फ वो था ,
और उसके ख़यालों में, मैं ही ना थी।।
पूनम😬
जब भी दिल ने चाहा, थोड़ी खुशी जी लें। धूप में खड़े होकर, थोड़ी छाँह पी लें। सोचा था कि अब तो, गम के बादल छटेंगे। खुशियों के फूल आँगन में,...
अभिनंदनम! स्वागतम पूनम जी। अर्से बाद आपके ब्लॉग पर। हलचल से अपार हर्ष हुआ। मन के भावों को प्रदर्शित करती पंक्तियां गागर में सागर है। आशा है आप ब्लॉग पर नियमित रहेंगी। इस संक्रमण काल में आपकी सरिवार कुशलता की कामना करती हूं,,🙏🌷🌷❤️💐🌷
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