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तोड़ते रहे तुम बंदिशें ,
और समेटती रही मैं,
बारंबार !
की कोशिश जोड़ने की,
कई बार !
पर गई मैं हार ,
हर बार !
समझ गई मैं,
क्यु हूँ बेकरार !
समेट सकती हूं,
पर जोड़ नहीं सकती।
जो टूट गया
सो टूट गया ।
यही है प्रकृति
का सार ।।
पूनम 🙏🙏
तोड़ते रहे तुम बंदिशें , और समेटती रही मैं, बारंबार ! की कोशिश जोड़ने की, कई बार ! पर गई मैं हार , हर बार ! समझ गई मैं, क्यु हूँ बेकरार ! ...